पर्दा 🔥

क्या कहूँ इसे मैं, घूंघट कहूँ या पर्दा कहूँ, हिजाब कहूँ या बुर्का कहूँ। चाहे जो कह लू हकीकत एक ही है, घूंघट, पर्दा, हिजाब, और बुर्का सब एक ही है। फर्क बस ये ही, मजहब बदल जाता है, घूंघट में हिन्दू तो बुर्के में मुसलमान बन जाता है। और पर्दे का हवाला देते हुए ये लोग नारी से कहते…

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ख्वाहिश 🍁🍁🍁

जब बच्चे थे तो जवानी की ख्वाहिश थी। अब जब जवान हुए तो बचपन की ख्वाहिश है। जब बेरोजगार से थे तब नौकरी की ख्वाहिश थी। और अब जब नौकरी मिली तो घर की ख्वाहिश है। रहते थे जब घर में सारा सारा दिन, तब बाहर रहने की ख्वाहिश थी। और अब जब हो गई है बोरियत सी, इन होस्टल…

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होते कौन हो तुम 🔥🔥🔥

होते कौन हो तुम? मुझे चरित्र प्रमाण पत्र देने वाले। होते कौन हो तुम? मेरी जिंदगी के फैसले लेने वाले। जिंदगी मेरी है तो फैसले भी मेरे होगें, जिस्म मेरा है तो कपड़े भी मेरे होगें। मेरे कपडों पर गंदी राजनीति करने वाले, होते कौन हो तुम मुझे चरित्र प्रमाण पत्र देने वाले। जब मैं बोलू, मुझे चुप रहने की…

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देश का अन्नदाता किसान👳💦

देश का अन्नदाता किसान अपना अस्तित्व खो रहा है अपना शत प्रतिशत योगदान देकर भी,  वो विकास में पिछड़ रहा है। देश का कर्णधार, देश का पालनहार, किसान से मजदूर, और मजदूर से बेलदार हो रहा है। बेशक सरकारें भी आती है, और साथ में बजट भी लाती है।  कुछ पल की आस किसान को भी बंधवा ही जाती है।…

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