एक जहान ऐसा भी ।

छोटे-छोटे थे सपने, छोटी-छोटी आँखों में जब रखा था कदम उसने अनजाने शहर में । नहीं जानती थी किसी को , बस जानती थी अपने विश्वास को और था ख़्वाब उसका, खुद की पहचान ढूंढने … Read More