देश का अन्नदाता किसान👳💦

देश का अन्नदाता किसान अपना अस्तित्व खो रहा है

अपना शत प्रतिशत योगदान देकर भी, 🌾

वो विकास में पिछड़ रहा है।

देश का कर्णधार, देश का पालनहार,

किसान से मजदूर, और मजदूर से बेलदार हो रहा है।

बेशक सरकारें भी आती है,

और साथ में बजट भी लाती है। 🌿🌱

कुछ पल की आस किसान को भी बंधवा ही जाती है।

पर अफ़सोस विकास फिर भी कागजों में ही हो रहा है

 

माना देश के GDP में साल दर साल मुनाफा हो रहा है

पर गौर करो………………………… क्या❓

आम आदमी के जीवन स्तर में भी इजाफा हो रहा है।

आज भी उस किसान का परिवार बिलख रहा है।

क्योंकि हर 37 मिनट में ,

कोई न कोई किसान आत्महत्या कर रहा है।

किसी माँ का लाल उसी की आखों के सामने,

उसी की गोद में, स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में,

उसी के आंचल में दम तोड़ रहा है।

हाँ वादे हजार किये थे, इन किसानों से

वोट बैंक की चाहत में,

पार्टी नेता भी आये थे यहाँ अपने ही वाहनों से।

पर लानत है, उन्हें कुर्सी भी मिली और शक्ति भी,

पर कोई नहीं पूछता पलटकर इन किसानों से,

कि भाई तेरी हालत कैसी है?

जब वक्त चुनावी रैली का आता है,

तब भी विवश वो किसान ही किया जाता है।

कभी वो मानसून की मार से मारा जाता है,

तो कभी महंगाई के इस वार से मारा जाता है।

मिलती है रियायतें गरीब किसानों 👳👳👳💦को,

ये सच नहीं सिर्फ मक्कारी है।

ये कर्ज माफी ये ब्याज मुक्त ऋण,

ये सब का सब सिर्फ किसान पर भारी है।

आज नहीं तो कल, इनकी कीमत इसे ही चुकानी है।

फिर भी मत किसान की मारी है,

GDP में अपना इग्लैंड से आगे निकलना,

हमारे नेता का, दुनिया के बड़े नेताओं से गले मिलना।

किसान सिर्फ इसे ही विकास जान रहा है।

अपने कहलराते हुए जीगर के टुकड़े की मौत को,

वो तो बस नियति का खेल मान रहा है।

ये कैसा दंश है………?

साल दर साल सत्ता पर काबिज नेता को ही,

वो अपना आदर्श मान रहा है।

अपने नौनिहालों की शिक्षा का,

पूरा इंतजाम भी वो कर रहा है।

पर बदले में देश का अन्नदाता,

ये किसान बिक रहा है।

सुनो! आज भी वो किसान बद से बदतर हो रहा है।

देश का अन्नदाता किसान अपना अस्तित्व खो रहा है।

किसान से मजदूर और मजदूर से बेलदार हो रहा है।

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